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दिनांक: 27 फरवरी 2026
स्थान: जनपद मथुरा, उत्तर प्रदेश
जनपद मथुरा में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नारायण हरी शुक्ला ने हाल ही में सामने आए उस प्रकरण पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसमें जगद्गुरु शंकराचार्य श्री अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला माघ मेले में बटुक ब्राह्मणों के साथ कथित मारपीट और प्रयागराज में नाबालिगों से जुड़े आरोपों से संबंधित बताया जा रहा है।
डॉ. शुक्ला ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह प्रकरण प्रथम दृष्टया एक सुनियोजित साजिश प्रतीत होता है और इसकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी पूज्य धार्मिक पद पर आसीन व्यक्तित्व के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, न कि भावनाओं या दबाव में।
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शिकायतकर्ता पर भी उठे प्रश्न
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि शिकायतकर्ता आशुतोष पाण्डे के विरुद्ध विभिन्न जिलों में कई आपराधिक मुकदमे पूर्व से पंजीकृत हैं। डॉ. शुक्ला के अनुसार, ऐसे में पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच होना और भी आवश्यक हो जाता है, ताकि सत्य स्पष्ट हो सके।
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मुख्य मांगें
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की ओर से निम्न प्रमुख मांगें रखी गईं:
मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
शिकायतकर्ता, संबंधित नाबालिगों एवं शंकराचार्य जी का वैज्ञानिक परीक्षण (जैसे लाई डिटेक्टर टेस्ट) कराया जाए।
जांच पूर्ण होने तक किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में कार्रवाई न की जाए।
डॉ. शुक्ला ने कहा कि कानून की प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए और जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होने दी जानी चाहिए।
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आंदोलन की चेतावनी
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो संगठन के सदस्य इस विषय में संवैधानिक माध्यमों से अपनी बात देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य को अत्यंत उच्च आध्यात्मिक स्थान प्राप्त है, और बिना ठोस साक्ष्यों के किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती है।
डॉ. शुक्ला ने अपने वक्तव्य में कहा:
> “सनातन प्रेमियों और अनुयायियों का कर्तव्य है कि वे अपने शंकराचार्य के सम्मान की रक्षा के लिए सजग रहें। आवश्यकता पड़ने पर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मार्ग से आंदोलन भी किया जाएगा। हम सत्य और न्याय की मांग कर रहे हैं।”
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निष्कर्ष
यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े प्रश्न न्याय, आस्था और सामाजिक संवेदनशीलता से भी संबंधित हैं। ऐसे में आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और तथ्यपरक हो, ताकि सत्य सामने आ सके और समाज में विश्वास बना रहे।
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लेखक:
डॉ. नारायण हरी शुक्ला
प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा
✍️ डॉ. नारायण हरी शुक्ला



